नैमिषारण्य की पावन परंपरा से गूंजा शिव महापुराण का मंगल संदेश
गुरु कृपा के बिना परमात्मा की कृपा संभव नहीं, कथा श्रवण से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति : केशव गिरी जी
सागर, 22 अगस्त 2026। उपनगरीय क्षेत्र मकरोनिया में बटालियन के पीछे स्थित वैदिक वाटिका में विश्वराष्ट्र कल्याण की भीना से पवित्र श्रावण माह के अवसर पर शुक्रवार से श्री शिव महापुराण कथा एवं असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन ब्रह्मलीन गृहस्थ संत पंडित श्री देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा जी महाराज की कृपा एवं प्रेरणा से श्री राम दरबार मंदिर के महंत गृहस्थ संत केशव गिरी जी महाराज के सानिध्य में सागर सांसद डॉ. लता गुड्डू वानखेड़े द्वारा कराया जा रहा है। कथा के पहले दिन सागर सांसद लता गुड्डू वानखेड़े, उनके परिजनों द्वारा विधि-विधान से दादा जी धुनी वालों के व दद्दा जी महाराज के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर शिव महापुराण की आरती उतारी गई। इसके बाद व्यास पीठ से परम पूज्य गुरुदेव श्री केशव गिरी जी महाराज ने भगवान भोलेनाथ, मां नर्मदा और सनातन धर्म की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि संतों और गुरुजनों की कृपा जीवन को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव अनंत कोटि ब्रह्मांड के नायक हैं और मां नर्मदा भगवान शिव की पुत्री के रूप में समस्त जीवों के का कल्याण करने वाली पवित्र धारा हैं।
उन्होंने मां नर्मदा की महिमा बताते हुए कहा कि उनके पावन तट पर देवता, ऋषि-मुनि और साधक तप एवं ध्यान करते हैं। मां नर्मदा की पवित्र भूमि पर भगवान शिव की आराधना और शिवलिंग निर्माण की परंपरा अनादि काल की है जो सनातन से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि जिस भूमि पर संतों का तप और आशीर्वाद रहा हो, वह भूमि स्वयं तीर्थ बन जाती है।
उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा के बिना परमात्मा की कृपा प्राप्त करना कठिन है। मनुष्य के जीवन में किसी भी शुभ कार्य के लिए पहले इच्छा, फिर उसके लिए प्रयास और अंत में भगवान का आशीर्वाद आवश्यक होता है। जब ये तीनों मिलते हैं, तभी जीवन में मंगलकारी परिणाम आते हैं।
भारत और सनातन धर्म में जन्म को बताया सौभाग्य
श्री केशव गिरी जी महाराज ने कहा कि अनेक जन्मों के पुण्य के उदय होने पर भारत भूमि में जन्म मिलता है और उससे भी बड़े पुण्य के उदय पर सनातन धर्म में जन्म लेने का अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि इसी पुण्य और ईश्वर की कृपा से कथा श्रवण एवं आयोजन का अवसर प्राप्त होता है।
कलयुग में धर्म की स्थापना का माध्यम है शिव महापुराण की कथा
शिव महापुराण की कथा का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान शिव से लेकर विभिन्न ऋषि-मुनियों और देवताओं तक शिव महापुराण की कथा की परंपरा पहुंची। इसी क्रम में नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने सूतजी महाराज से कलयुग में मानव जीवन के कल्याण का उपाय पूछा।
ऋषियों ने पूछा कि सतयुग, त्रेता और द्वापर के बाद जब कलियुग का प्रभाव बढ़ेगा, पाप और अधर्म बढ़ेंगे, संस्कार कमजोर होंगे तथा मनुष्य धर्म से विमुख होगा, तब वह अपने जीवन को कैसे सार्थक बना सकेगा।
केशव गिरी जी महाराज ने बताया कि सतयुग में धर्म चारों चरणों पर स्थापित था। सत्य के कमजोर होने से धर्म तीन चरणों पर बचा, त्रेता द्वापर में धर्म के तीन चरण नष्ट हो गए कलयुग में धर्म सिर्फ एक चरण पर स्थित है। ऐसे समय में भक्ति, सत्संग और कथा श्रवण ही मनुष्य को धर्म के मार्ग पर बनाए रखने के प्रमुख साधन हैं।
नैमिषारण्य में हुई कथा परंपरा की शुरुआत
महाराज ने नैमिषारण्य की महिमा बताते हुए कहा कि जब ऋषि-मुनियों ने लंबे समय तक कथा श्रवण के लिए पवित्र स्थान की आवश्यकता बताई, तब ब्रह्माजी ने एक चक्र उत्पन्न किया। उन्होंने ऋषियों से कहा कि जहां यह चक्र जाकर रुके, वहीं कथा का आयोजन किया जाए। चक्र नैमिषारण्य में जाकर रुका और उसी स्थान पर पवित्र जलकुंड का प्राकट्य हुआ। जो चक्र तीर्थ के नाम से विख्यात हुआ
उन्होंने कहा कि नैमिषारण्य की पवित्र भूमि से अनेक पुराणों, वेदों और धार्मिक कथाओं के श्रवण की परंपरा जुड़ी हुई है। यही कारण है कि सनातन परंपरा में नैमिषारण्य का विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।
कथा श्रवण से जीवन में आता है मंगल
श्री केशव गिरी जी महाराज ने कहा कि सनातन शास्त्रों में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को मानव जीवन के चार पुरुषार्थ बताया गया है और कथा-सत्संग इन चारों पुरुषार्थों की दिशा में मनुष्य का मार्गदर्शन करता है।
कथा के पश्चात श्रद्धालुओं द्वारा बनाए गए पार्थिव शिवलिंगों की विधिवत पूजा-अर्चना कर अभिषेक किया गया। इसके बाद सांसद सहित समस्त श्रद्धालुओं ने शिवलिंगों को अपने सिर पर रखकर गाजे बाजे के साथ विसर्जन के लिए प्रस्थान किया। उसके पश्चात श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण की।
प्रातः 8 बजे से ही श्रद्धालु करने लगते हैं पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण
प्रातः 8 बजे से ही श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचकर पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण करने लगते हैं, जिनका परम पूज्य महाराज जी द्वारा एक साथ अभिषेक कराया जाता है।
आज की कथा में मुख्य रूप से हररिसिंह गौर वि.वि. के कुलपति यशवंत सिंह ठाकुर, श्री सुनील देव, पूर्व विधायक श्री सुनील जैन, पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष श्री हरिराम सिंह ठाकुर, श्री सुखदेव मिश्र, अनिल तिवारी, महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष सुश्री मेधा दुबे, श्री निकेश गुप्ता , श्री विजय गौतम , राजेंद्र सिलाकारी श्री सुरेंद्र सुहाने श्री उत्तम सिंह, श्री संतोष ठाकुर, शिवकुमार यादव, बलराम तिवारी, बलराम पाराशर, उमेश, श्रीमती आशा सिलाकारी, सिंह, अखलेश गौर,आर एन दुबे, जे ऐन दुबे, राजा रिछारिया इंजीनियर महेंद्र गोस्वामी, शिशिर सराफ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।