Wed 23 Sep 2026

ब्रेकिंग

अवैध शराब बंद कराने, सिलौंडी चौकी प्रभारी को सौंपा ज्ञापन; चक्का जाम - आंदोलन की दी चेतावनी,

आक्रोशित ग्रामीणों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग, माहौल बिगड़ने की चेतावनी

विद्यार्थियों ने रंगों से उकेरी 'सपनों के भारत' की मनमोहक झलक

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसना में शुकदेव दास वैष्णव बने विधायक प्रतिनिधि, विधायक डॉ. सम्पत अग्रवाल ने जारी किया आदेश

कटनी। कायस्थ महासभा युवा प्रकोष्ठ की बैठक: सदस्यता अभियान और 19 नवंबर के सम्मेलन की रणनीति पर मंथन कटनी।

सुचना

एमपी न्यूज लाइव मीडिया ग्रुप आपका हार्दिक स्वागत करता

MP न्यूज लाइव मासिक अखबार एवं सेटेलाइट हिंदी न्यूज चैनल सेटेलाइट एवं ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध :- Play on tv , DTH Live, Ebaba, CNN, PLAYON, AMAZON FIRE STICK, JIO AIR FIBRE

कटनी-स्लीमनाबाद तहसील में खनिज माफिया के हौसले बुलंद : स्लीमनाबाद में खनन माफिया राज! भूला-टिकरिया में फिर दहाड़ीं मशीनें, अब 'सरसवाही' को बनाया नया ठिकाना

पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी

Mon, Jun 8, 2026

कटनी-स्लीमनाबाद तहसील में खनिज माफिया के हौसले बुलंद
स्लीमनाबाद में खनन माफिया राज! भूला-टिकरिया में फिर दहाड़ीं मशीनें, अब 'सरसवाही' को बनाया नया ठिकाना

कटनी : स्लीमनाबाद तहसील में खनिज माफिया के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें अब न तो कानून का खौफ है और न ही प्रशासन की 'कागजी सख्ती' का। 'भारत दिनभर' के खोजी तंत्र ने एक ऐसा बड़ा खुलासा किया है जो जिला प्रशासन और खनिज विभाग की नींद उड़ाने के लिए काफी है। कुछ महीनों की तथाकथित 'शांति' के बाद माफिया ने न केवल भूला-टिकरिया में दोबारा पैर पसार लिए हैं, बल्कि अब पड़ोस के शांत सरस्वाही क्षेत्र को भी अपना नया शिकार बना लिया है।

पार्ट-1: भूला-टिकरिया में खत्म हुआ 'रणनीतिक ब्रेक', फिर शुरू हुआ वही खेल

जनवरी-फरवरी के महीने में जब 'भारत दिनभर' ने आवाज उठाई थी, तब अफसरों ने आनन-फानन में दौड़ लगाकर कुछ दिन के लिए काम रुकवा दिया था। ग्रामीणों को लगा था कि अब उनकी उपजाऊ जमीन और सुरक्षित सड़कें वापस मिल जाएंगी। लेकिन वह शांति सिर्फ एक दिखावा थी।

* बेखौफ वापसी: ग्राम भूला (खसरा नं. 54) और टिकरिया (खसरा नं. 92, 219) की शासकीय भूमि पर एक बार फिर भारी पोकलेन मशीनें गरजने लगी हैं और हाईवा ट्रकों का तांता लग गया है।

* राजस्व पर डाका: बिना किसी वैध रॉयल्टी के, हजारों टन कीमती बॉक्साइट धड़ल्ले से निकालकर शासन को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।

पार्ट-2: भूला-टिकरिया में गरमाया मामला, तो 'सरसवाही' पहुंचे माफिया के पंजे

माफिया की चालाकी का अंदाजा इस बात से लगाइए कि जैसे ही भूला-टिकरिया के ग्रामीणों ने लामबंद होकर भोपाल (मुख्यमंत्री) तक शिकायत भेजने की तैयारी की, माफिया ने रातों-रात अपनी रणनीति बदल ली। प्रशासन को चकमा देने के लिए अब सरसवाही क्षेत्र को नया 'सेफ जोन' बना लिया गया है।

मशीनों का रूट डायवर्जन: पोकलेन और हाईवा के काफिले को अब सरसवाही की शासकीय और वन भूमियों की तरफ मोड़ दिया गया है।

एक जगह दिखावा, दूसरी जगह कमाई: भूला-टिकरिया में विरोध होने पर वहां काम धीमा कर दिया जाता है और उसी दौरान सरस्वाही में दोगुनी रफ्तार से उत्खनन कर भरपाई कर ली जाती है।

बदहाल सड़कें, उड़ती धूल और ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

चाहे भूला-टिकरिया हो या नया शिकार बना सरसवाही, माफिया के इस दोतरफा हमले से पूरा क्षेत्र कराह उठा है।

जर्जर रास्ते: ओवरलोड ट्रकों के वजन से गांव की अंदरूनी सड़कें पूरी तरह धंस चुकी हैं।

खेती बर्बाद: उपजाऊ मिट्टी को बेतरतीब फेंकने से किसानों की जमीन बंजर हो रही है।

रातभर उत्खनन: सूत्रों के अनुसार, अब सारा खेल 'नाइट शिफ्ट' में बदला जा रहा है, ताकि रात के अंधेरे में भारी माल पार किया जा सके।

* "कुछ महीने काम बंद रहा तो हमें लगा कि सरकार जाग गई। लेकिन यह तो माफिया की चाल थी। एक तरफ हमारा भूला-टिकरिया फिर से खोदा जा रहा है, तो दूसरी तरफ हमारे पड़ोसी गांव सरस्वाही को भी तबाह किया जा रहा है। क्या अफसरों और माफिया में कोई सांठगांठ है?" — एक आक्रोशित स्थानीय ग्रामीण

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन

विज्ञापन

विज्ञापन