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कटनी में गुटखा कारोबार का ‘कैश खेल’! : कटनी- सरकारी फाइलों में 'सफेद', बाजार में 'ब्लैक': टैक्स विभाग को धुआं उड़ाकर 'कैश' बटोर रहे पटेल साहब

पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी

Fri, May 29, 2026

सरकारी फाइलों में 'सफेद', बाजार में 'ब्लैक': टैक्स विभाग को धुआं उड़ाकर 'कैश' बटोर रहे पटेल साहब

कटनी में गुटखा कारोबार का ‘कैश खेल’!
एक बिल पर 10 गाड़ियां ‘गायब’, GST को करोड़ों का चूना?

कटनी। कहते हैं गुटखा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, लेकिन इन दिनों तंबाकू जगत के दो बड़े ‘शहंशाह’ कटनी समेत आसपास के शहरों की अर्थव्यवस्था की सेहत बिगाड़ने में जुटे हैं। बाजार के गलियारों में चर्चा है कि नगद नारायण ‘कैश’ की महिमा और अलग ‘सरनेम’ से मशहूर एक बड़े ब्रांड ने नया आर्थिक मॉडल खोज निकाला है—“तुम मुझे नगदी दो, मैं तुम्हें बिना बिल का स्वाद दूंगा!”

डिजिटल इंडिया और सख्त टैक्स नियमों के दौर में इन कंपनियों ने अपनी अलग ही ‘कैश-कॉनामी’ खड़ी कर ली है।

एक गाड़ी बिल वाली, बाकी सब ‘मिस्टर इंडिया’!

बाजार में इन दिनों इन कंपनियों की गाड़ियों का आना-जाना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं बताया जा रहा। कारोबारियों के मुताबिक, टैक्स विभाग को दिखाने के लिए सिर्फ एक गाड़ी का पक्का बिल काटा जाता है, जबकि उसी बिल की आड़ में कई गाड़ियां बिना किसी टैक्स दस्तावेज के सीधे गोदामों तक पहुंच जाती हैं।

व्यापारियों का दावा है कि पूरा खेल नगद लेन-देन पर आधारित है, जहां कागजों में कारोबार छोटा और जमीन पर कई गुना बड़ा दिखाई देता है।

रिटेलर्स की मजबूरी: “बिल मांगोगे तो माल बंद”

छोटे दुकानदारों की स्थिति सबसे ज्यादा असहज बताई जा रही है। डिजिटल भुगतान के दौर में भी उन्हें इन ब्रांड्स का माल खरीदने के लिए कैश लेकर जाना पड़ता है।

सूत्रों का कहना है कि यदि कोई दुकानदार बिल मांग ले, तो उसे अगली सप्लाई रोकने तक की चेतावनी दे दी जाती है। नतीजा यह कि अधिकांश रिटेलर चुपचाप बिना बिल का माल उठाने को मजबूर हैं।

सरकार को टैक्स का ‘स्लो प्वॉइजन’?

जानकारों का मानना है कि यदि बाजार में चल रही चर्चाएं सही हैं, तो इससे GST राजस्व को बड़ा नुकसान हो सकता है। सरकार लगातार कैशलेस और पारदर्शी कारोबार की बात कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी बड़े पैमाने पर नकद कारोबार होने के आरोप सामने आ रहे हैं।

अब सवाल यह है कि जांच एजेंसियां और GST विभाग इस कथित ‘बिना बिल वाले धंधे’ तक कब पहुंच पाते हैं, या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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