कटनी में शराब के कथित अवैध कारोबार पर उठे गंभीर सवाल : होटलों में बिना लाइसेंस शराब परोसने, गली-मोहल्लों तक पहुंचाने और मनमाने दाम वसूलने के आरोप; आबकारी विभाग की निगरानी पर स
पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी
Tue, Aug 11, 2026
कटनी में शराब के कथित अवैध कारोबार पर उठे गंभीर सवाल
होटलों में बिना लाइसेंस शराब परोसने, गली-मोहल्लों तक पहुंचाने और मनमाने दाम वसूलने के आरोप; आबकारी विभाग की निगरानी पर सवाल
कटनी। शहर में शराब के कथित अवैध कारोबार और आबकारी नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के कुछ होटल संचालकों पर बिना वैध लाइसेंस होटल परिसरों में शराब परोसने और बेचने के आरोप लगाए जा रहे हैं। वहीं शासकीय देशी एवं अंग्रेजी शराब दुकानों पर भी निर्धारित नियमों के पालन को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ शराब दुकानों पर निर्धारित रेट लिस्ट प्रमुखता से प्रदर्शित नहीं की जा रही है, जिसके चलते ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जाने की शिकायतें हैं। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह आबकारी व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्कूटी और कार से गली-मोहल्लों तक शराब पहुंचाने के आरोप
शहर के विभिन्न इलाकों में स्कूटी और अन्य वाहनों के माध्यम से शराब पहुंचाने और बेचने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। आरोप है कि कथित अवैध शराब कारोबार अब गली-मोहल्लों तक पहुंच गया है। इससे खासकर युवा वर्ग में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर चिंता जताई जा रही है।
सवाल यह है कि यदि इस तरह का अवैध कारोबार सक्रिय है तो निगरानी तंत्र की नजर इससे क्यों नहीं पड़ रही? क्या जिम्मेदार विभाग को इसकी जानकारी नहीं है या शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही?
हॉकर जोन और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में भी शराबखोरी की शिकायत
अलका होटल के सामने नगर निगम द्वारा बनाए गए हॉकर जोन में दिनभर शराबखोरी होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी तरह कटनी रेलवे स्टेशन के समीप संचालित शराब दुकान के बाहर भी शराब खरीदने और सार्वजनिक स्थान पर सेवन करने वालों की भीड़ रहने की शिकायतें सामने आई हैं।
यदि सार्वजनिक स्थानों के आसपास इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं तो इससे आम नागरिकों, यात्रियों और परिवारों को असुविधा के साथ कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
10-20 पाव की कार्रवाई या पूरे सप्लाई नेटवर्क पर शिकंजा?
शहर में अवैध शराब के खिलाफ होने वाली कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई मामलों में कार्रवाई कुछ पाव शराब की जब्ती और छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित रह जाती है, जबकि कथित बड़े सप्लाई नेटवर्क तक कार्रवाई नहीं पहुंच पाती।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या छोटे मामलों में कार्रवाई कर आंकड़े पूरे करना पर्याप्त है, या फिर अवैध शराब के स्रोत, परिवहन, भंडारण और बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जरूरत है?
नशा मुक्ति अभियान 2.0 के धरातलीय असर पर सवाल
कटनी पुलिस द्वारा जिले में नशे के खिलाफ जागरूकता और कार्रवाई के उद्देश्य से नशा मुक्ति अभियान 2.0 चलाया गया था। अभियान के दौरान पुलिस बल, प्रशासनिक संसाधनों और सरकारी मशीनरी के माध्यम से नशे के खिलाफ संदेश दिया गया।
लेकिन यदि अभियान के बाद भी शहर में खुलेआम शराब बिक्री, कथित अवैध परिवहन और सार्वजनिक स्थानों पर शराबखोरी की शिकायतें सामने आती हैं, तो अभियान के धरातलीय असर को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या सरकारी अभियान केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित है? क्या कटनी को नशे के दुष्प्रभावों से मुक्त करने का लक्ष्य वास्तव में जमीन पर दिखाई दे रहा है? और यदि अवैध शराब कारोबार सक्रिय है तो उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई कब होगी?
आबकारी विभाग की निगरानी पर बड़ा सवाल
शराब के अवैध कारोबार पर नियंत्रण और आबकारी नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। ऐसे में शहर में सामने आ रही शिकायतों की निष्पक्ष जांच और दोष पाए जाने पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।
इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी विभा मरकाम से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब देखना यह है कि कटनी में आबकारी विभाग इन शिकायतों की जांच कर होटलों, शराब दुकानों, कथित अवैध परिवहन और गली-मोहल्लों में शराब बिक्री के आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है।
सवाल सीधा है—जब सरकार नशामुक्ति की बात कर रही है, तो कटनी में कथित रूप से फैल रहे शराब के अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी?
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन