बिना सड़क बने ही कागज पर बह गए 90 हजार : जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत कोठी में विकास कार्यों में भारी भ्रष्टाचार के आरोप, इंजीनियर संदेह के घेरे में
हिमांशु
Sun, Aug 2, 2026
मध्य प्रदेश
कटनी/ढीमरखेड़ा- ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अंचलों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार हर साल करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत करती है।लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कागजी विकास और भौतिक सत्यापन के अभाव में यह सरकारी धन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। ऐसा ही एक ताजा और सनसनीखेज मामला जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत कोठी से सामने आया है, जहां बिना सड़क का निर्माण हुए ही 90,000 रुपये का व्यय दर्ज कर दिया गया है। इस घपले का खुलासा होने के बाद से ही क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और स्थानीय लोगों ने पंचायत प्रशासन तथा जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भ्रष्टाचार के पैसे से सरपंच बनवा रहा घर
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विभागीय पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, ग्राम पंचायत कोठी में एक सड़क निर्माण कार्य के लिए कुल ₹1,50,000 (एक लाख पचास हजार रुपये) की राशि स्वीकृत की गई थी।कागजों में यह दिखाया गया कि पंचायत क्षेत्र में आवागमन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह राशि मंजूर हुई है। लेकिन चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब संबंधित सरकारी पोर्टल पर इस स्वीकृत कार्य के एवज में ₹90,000 (नब्बे हजार रुपये) का व्यय दर्ज दिखा दिया गया। जब ग्रामीणों ने धरातल पर जाकर देखा, तो वहां सड़क का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं था। स्थल पर स्थिति शून्य है, लेकिन पोर्टल पर 90 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। यदि निर्माण कार्य हुआ ही नहीं, तो आखिर यह राशि किसकी जेब में गई? स्थानीय ग्रामीणों का सवाल। सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का आरोप
ग्रामीणों का सीधे तौर पर आरोप है कि यह सार्वजनिक धन के गबन, धोखाधड़ी और गंभीर वित्तीय अनियमितता का सीधा मामला है। बिना कार्य कराए ही पोर्टल पर खर्च दर्शाना इस बात की ओर इशारा करता है कि पंचायत स्तर पर कागजी खानापूर्ति करके सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि यह केवल 90 हजार रुपये की बात नहीं है, बल्कि यह उस पूरी पंचायत व्यवस्था की पोल खोलता है जहां कागजी विकास के नाम पर फंड ठिकाने लगा दिए जाते हैं और जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसती रहती है।
तकनीकी प्रक्रिया पर भी खड़े हुए गंभीर सवाल
किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में भुगतान या व्यय दर्ज करने से पहले एक पूरी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस मामले ने उस पूरी प्रक्रिया की प्रामाणिकता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है तकनीकी स्वीकृति क्या कार्य वास्तव में शुरू करने योग्य था मापन पुस्तिका क्या उप-यंत्री ने स्थल का दौरा करके एमबी में फर्जी एंट्री की? बिल और वाउचर सामग्री की खरीदारी और मजदूरी के कौन से बिल पोर्टल पर अपलोड किए गए?
भुगतान विवरण 90 हजार रुपये की यह राशि किस सचिव या एजेंसी के खाते में हस्तांतरित की गई? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिना भौतिक सत्यापन और बिना उप-यंत्री की हरी झंडी के पोर्टल पर व्यय दर्ज होना असंभव है। इससे साफ जाहिर होता है कि इस पूरे खेल में केवल पंचायत स्तर के प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि तकनीकी अधिकारी भी बराबर के साझेदार हो सकते हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
मामला उजागर होने के बाद ग्राम पंचायत कोठी के निवासियों ने एकजुट होकर जिला प्रशासन और जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा से तत्काल कार्रवाई की मांग की है निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच: पूरे प्रकरण की जांच के लिए जनपद या जिला स्तर से एक स्वतंत्र जांच दल गठित किया जाए। भौतिक सत्यापन वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में निर्माण स्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए और वीडियो-ग्राफिक साक्ष्य जुटाए जाएं। दस्तावेजों का प्रकटीकरण संबंधित कार्य की मापन पुस्तिका (MB), बिल, वाउचर, और भुगतान विवरण सार्वजनिक किए जाएं ताकि पारदर्शिता बनी रहे। सख्त दंडात्मक कार्रवाई यदि जांच में बिना काम के राशि का व्यय सिद्ध होता है, तो दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रतिनिधियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर राशि की वसूली की जाए।
पंचायत व्यवस्था और पारदर्शिता पर आघात
पंचायती राज व्यवस्था की नींव इस सिद्धांत पर रखी गई थी कि गांव का विकास गांव के लोगों के हाथों में होगा और उसमें पूर्ण पारदर्शिता रहेगी।लेकिन ग्राम पंचायत कोठी का यह प्रकरण यह दर्शाने के लिए काफी है कि कैसे पारदर्शिता के दावों को धत्ता बताकर डिजिटल पोर्टल का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई नहीं की जाती है, तो इससे भ्रष्टाचार करने वालों के हौसले बुलंद होंगे और आम जनता का सरकारी तंत्र से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा।
होना चाहिए कार्यवाही इंजीनियर के ऊपर भी निलंबन की गिरे गाज
ढीमरखेड़ा जनपद के ग्राम पंचायत कोठी का यह मामला अब तूल पकड़ चुका है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस पर क्या संज्ञान लेते हैं। क्या केवल औपचारिक जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति होगी, या फिर वास्तव में स्थल निरीक्षण करके दोषियों को बेनकाब किया जाएगा? क्षेत्र की जनता अब आर-पार के मूड में है और उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और पाई-पाई का हिसाब नहीं मिलता, तब तक यह आवाज उठती रहेगी।
Mpneswlive
कटनी जिला रिपोर्टर हिमांशु
Tags :
Mpnewslive
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन