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महासमुंद : सराईपाली में 10 दिवसीय 'अज़ीमुश्शान ज़िक्र-ए-हुसैन'

फिरोज खान संभाग प्रमुख रायपुर

Mon, Jun 22, 2026

सराईपाली में 'अज़ीमुश्शान ज़िक्र-ए-हुसैन': मुफ्ती गुलाम मुहीयुद्दीन कादरी ने बयां की शेर-ए-खुदा और खातून-ए-जन्नत की सीरत

सराईपाली: मुस्लिम जमात सराईपाली के तत्वावधान में स्थानीय मदरसा निज़ामिया में 16 जून से 26 जून तक चलने वाले 10 दिवसीय 'अज़ीमुश्शान ज़िक्र-ए-हुसैन' के रूहानी आयोजन में अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस मुकद्दस महफ़िल में अहल-ए-बैत और कर्बला के शहीदों की अज़ीम कुर्बानियों को पूरी अकीदत और एहतेराम के साथ याद किया जा रहा है। इसी कड़ी में कार्यक्रम की छठी शब दीनी और रूहानी लिहाज़ से बेहद ख़ास रही, जहाँ 'असीर-ए-अहल-ए-बैत, खतीब-ए-हिंदुस्तान' हज़रत अल्लामा व मौलाना मुफ्ती गुलाम मुहीयुद्दीन कादरी साहब (बनारस, उत्तर प्रदेश) ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। मुफ्ती साहब ने अपने प्रभावशाली और इल्मी बयान में 'सीरत और फ़ज़ाइल शेर-ए-खुदा हज़रत अली' तथा 'खातून-ए-जन्नत हज़रत सैयदा फ़ातिमा ज़हरा' के मुकद्दस विषय पर विस्तार से रोशनी डाली। अपने ख़िताब के दौरान उन्होंने आवाम को एक अहम नसीहत देते हुए कहा कि मुस्लिम मर्द अपनी ज़िंदगी में हज़रत अली को अपना आदर्श (आइडियल) बनाएं और उनके नक्शे-कदम पर चलें, वहीं महिलाओं को चाहिए कि वे हज़रत फ़ातिमा ज़हरा की पाकीज़ा सीरत को अपना रहनुमा और प्रेरणास्रोत मानें। उनके इस मार्मिक और रूहानी बयान ने महफ़िल में मौजूद हर शख्स के दिल को अहल-ए-बैत की मोहब्बत से सराबोर कर दिया।

इस 10 दिवसीय आयोजन की एक और विशेषता यह है कि जहाँ रातों को तकरीरों की नूरानी मजलिसें सज रही हैं, वहीं दोपहर के वक़्त महिलाओं द्वारा विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में महिलाएं मैदान-ए-कर्बला में हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 जांनिसार साथियों की अज़ीम शहादत का ज़िक्र करते हुए उन्हें खिराज़-ए-अकीदत पेश कर रही हैं, जिसमें उनकी सक्रिय और भरपूर भागीदारी देखने को मिल रही है।

मदरसा निज़ामिया में चल रहे इस अज़ीमुश्शान और ऐतिहासिक कार्यक्रम को कामयाब बनाने में मस्जिद के पेश इमाम अब्दुल सत्तार अशरफी, मुदर्रिस सिराजुल हक़ और मोअज़्ज़िन मुस्लिम अत्तारी का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही, मुस्लिम जमात कमेटी के सभी निष्ठावान पदाधिकारियों और सराईपाली के आम नागरिकों के अथक परिश्रम, सहयोग और समर्पित भावना से यह दस दिवसीय दीनी सफ़र सफलतापूर्वक अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में एक अद्भुत रूहानी और शांतिपूर्ण माहौल बना हुआ है।

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