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​कटनी और शहडोल की खदानों के टेंडर रद्द करने का निर्णय सही : कटनी-​रेत खदानों के टेंडर में 'खेल' करना कंपनियों को पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने लगाई सरकार के फैसले पर मुहर,

पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी

Sun, Mar 22, 2026

​रेत खदानों के टेंडर में 'खेल' करना कंपनियों को पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने लगाई सरकार के फैसले पर मुहर,

​कटनी और शहडोल की खदानों के टेंडर रद्द करने का निर्णय सही: याचिकाएं खारिज

​जबलपुर/मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कटनी और शहडोल जिलों की रेत खदानों के टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की कोशिश करने वाली कंपनियों को बड़ा झटका दिया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार द्वारा टेंडर रद्द करने के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए दो कंपनियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी राजस्व को नुकसान पहुँचाने वाली किसी भी हेरफेर को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

​क्या था पूरा मामला?

​यह विवाद मुंबई की सहकार ग्लोबल लिमिटेड और होशंगाबाद की धनलक्ष्मी मर्चेंडाइज से जुड़ा है। इन कंपनियों ने पहले कटनी और शहडोल की रेत खदानों के ठेके ऊंची बोली लगाकर हासिल किए थे, लेकिन बाद में चालाकी दिखाते हुए उन्हें सरेंडर कर दिया। जब सरकार ने दोबारा टेंडर जारी किए, तो इन्हीं कंपनियों ने मिलकर कम बोली लगाई ताकि कम कीमत पर खदानें हथियाई जा सकें।

​30 करोड़ के राजस्व नुकसान की थी आशंका

​मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन के वकीलों ने दलील दी कि कंपनियों के इस 'खेल' से सरकार को भारी आर्थिक चपत लगने वाली थी।

​एक मामले में 10 करोड़ और ​दूसरे मामले में 20 करोड़ से अधिक के राजस्व नुकसान की संभावना थी।

​इसी आधार पर माइनिंग कॉरपोरेशन के बोर्ड ने 19 नवंबर 2025 को टेंडर प्रक्रिया रद्द करने का साहसिक निर्णय लिया था।

​कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "यह महज एक खेल था"

​डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि कंपनियों ने कम बोली लगाकर व्यवस्था के साथ खेलने की कोशिश की। कोर्ट ने माना कि यदि सरकार इस टेंडर को स्वीकार कर लेती, तो यह जनता के पैसे और सरकारी खजाने के साथ अन्याय होता। माननीय न्यायालय ने साफ कहा कि सरकार के इस वैध फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है।"

​आंशिक राहत: हालांकि, कोर्ट ने कंपनियों को भविष्य के लिए एक छोटी राहत देते हुए कहा कि वे आगे निकलने वाले नए टेंडरों में हिस्सा ले सकेंगी और यह आदेश उनके लिए भविष्य की बोली में रुकावट नहीं बनेगा।इस फैसले के बाद अब कटनी और शहडोल की रेत खदानों के लिए नए सिरे से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिससे क्षेत्र के राजस्व में बढ़ोतरी सुनिश्चित हो सकेगी।

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